जय-जिनेंद्र ब्रमहचारी सतीश

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एक बार एक संत अपने चेले के साथ किसी कीचड़ भरे रास्ते पर जा रहे थे,उसी रास्ते पे एक अमीरजादा अपनी प्रेमिका के साथ जा रहा था,जब संत उस के पास से गुजरे तो कुछ छींटे अमीरजादे की प्रेमिका पर पड़ गए।अमीरजादे ने गुस्से में दो तीन चांटे उस संत को जड़ दिए, संत चुपचाप आगे चले गये ।
संत के चेले ने पूछा आप ने उसे कुछ कहा क्यों नहीं, इसपर भी संत चुप रहे ।
पीछे चलता अमीरजादा अचानक फिसल कर कीचड़ में गिर गया और बुरी तरह से लिबड़ गया, साथ ही उठा और की बाजु भी टूट गई, तब संत ने अपने चेले से कहा देख जैसे वो अमीरजादा अपनी यार की तौहीन नहीं देख सका ,ठीक उसी तरह ऊपर बैठा मेरा यार भी अपने यार की तौहीन नहीं देख सका ।

जय-जिनेंद्र??????
✍?ब्रमहचारी सतीश

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