जैन धर्म ने समाज और देश के विकास और शांति हेतु सदैव तन-मन-धन दिया है

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जैन धर्म ने समाज और देश के विकास और शांति हेतु सदैव तन-मन-धन दिया है। दिगम्बर संत तरुणसागरजी ने सदैव समाजहित में कार्य किया है।प्राचीन समय में भी राजा महाराजा सन्यासियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया करते थे।

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समय समय पर प.पू.आचार्य श्री तुलसीजी, आचार्य सुशीलमुनिजी, आचार्यमहाप्रज्ञजी, आचार्य विद्यासागरजी, मुनि तरूणसागरजी एवं मुझे स्वयं को लोकसभा, विधानसभा व संयुक्त राष्ट्रसंघ को सम्बोधित करने का अवसर मिला है उससे धर्म निरपेक्षता खतरे में नहीं पड़ी है (हालाँकि भारत को धर्म निरपेक्ष देश कहना ही ग़लत है। धर्म तो इस देश की आत्मा है उससे व निरपेक्ष कैसे हो सकता है। हॉ उसे पंथ निरपेक्ष, मज़हब निरपेक्ष, सम्प्रदाय निरपेक्ष कह सकते है।)
मेरी समझ में धर्म में राजनीति का प्रवेश नहीं होना चाहिए किन्तु राजनीति सदैव धर्म से प्रभावित होनी चाहिए। इस सम्पूर्ण प्रकरण में भी हमें जैन एकता का परिचय देते हुए अत्यन्त सावधान रहते हुए दलीय राजनैतिक का हिस्सा बने बिना न्याय के लिए आगे बढ़ना है।संथारे के समय की एकता का दर्शन कराना है। मैं शरीर से भले ही पर्युषण महापर्व की आराधना कराने के लिए अमेरिका के अटलांटा जैन सेंटर में हूँ किन्तु भावनाओं से आपके साथ हूँ

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